अब रेल बजट पर भी एनडीए में तोड़फोड़

July 4th, 2009

आलोक तोमर
डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 4 जुलाई-
अब ममता बनर्जी के रेल बजट को ले कर एनडीए में फूट पड़ गई है। बिहार में एनडीए की सरकार चला रहे नीतिश कुमार ने ममता बनर्जी के बजट को बहुत कायदे का बताया है। नीतिश कुमार खुद भी रेल मंत्री रह चुके है।

एनडीए और खास तौर पर भाजपा में नीतिश कुमार के इस बयान पर गंभीर आपत्ति जाहिर की गई है। भाजपा ने ममता बनर्जी के बजट को जन विरोधी और भुलावे में डालने वाला करार दिया है और एनडीए के ही एक मुख्यमंत्री अगर बजट की सराहना करें तो भाजपा को दिक्कत होनी स्वाभाविक है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता और भूतपूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस बारे में सिर्फ ये कहा कि नीतिश कुमार का बयान असमय और अकारण है। उन्होंने यह भी कहा कि नीतिश कुमार लालू यादव को निपटाने की शैली में ये बयान दे रहे हैं और उनकी राजनैतिक मजबूरी समझी जा सकती है।

भाजपा और राष्ट्रीय जनता दल के नेता इस मामले में एक ही सुर में बोल रहे हैं। उनका कहना है कि बिहार को रेल बजट में उपेक्षित किया गया है। लालू ने तो नान स्टॉप रेलों के बारे में कहा कि रेल कलकत्ता जा कर रुकेगी और पटना वाले उसे टाटा करते रह जाएंगे। मगर नीतिश कुमार ने बाकायदा ममता बनर्जी को इस बात के लिए धन्यवाद दिया है कि बिहार के लिए जो बड़ी रेल परियोजनाएं घोषित की गई थी उनमें से कोई भी समाप्त नहीं की गई है। नीतिश ने उपदेश की मुद्रा में कहा कि मैं खुद रेल मंत्री रहा हूं और यह जिम्मेदारी जानता हूं कि रेल बजट पर भूतपूर्व रेल मंत्री को क्या कहना चाहिए? उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी के बजट भाषण्ा ने लालू यादव के उस दावे की पोल खोल दी है जिसमें कहा गया था कि रेलवे के पास अपार पैसा है।

ममता बनर्जी के इस बयान ने लालू यादव की और ज्यादा नींद उड़ा दी है कि रेलवे के काम काज और आमदनी को ले कर आम जनता के लिए एक श्वेत पत्र जारी किया जाएगा जिसमें लालू यादव द्वारा किए गए रेल मंत्रालय की सफलताओं के सभी दावों की समीक्षा की जाएगी। उधर उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक जो एक संक्षिप्त बगावत के बाद वापस एनडीए में आ गए हैं, ममता के बजट ने नाराज हैं। हालांकि कटक और भुवनेश्वर को विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन घोषित किया गया है लेकिन नवीन पटनायक ने बजट की आलोचना की है और कहा है कि उड़ीसा को रेल बजट में उचित हिस्सा नहीं मिला।

अब पाकिस्तान से आए हजार के नकली नोट

July 4th, 2009



अंशू सिंह
डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 4 जुलाई-
भारत में एक हजार रुपए के नकली नोटों की एक बड़ी खेप पाकिस्तान से आ चुकी है और मुंबई, दिल्ली, बंगलौर, गोवा, हैदराबाद और कोलकाता के अलावा कई छोटे शहरों में ये नोट चल रहे हैं।

गुप्तचर ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार इस बार आई खेप सबसे बड़ी है और नकली नोटों की गिनती अरबों रुपए में हो सकती है। कई जगह बैंकों और दुकानों से नकली नोट बरामद किए गए हैं और खास तौर पर मुंबई पुलिस की एंटी टेरर स्कवाड-एटीएस ने पड़ताल कर के पाया है कि पाकिस्तान से बांग्लादेश और वहां से बंगाल होते हुए ये नोट भारत में आ रहे हैं। एटीएस अधिकारियों का यह भी कहना है कि अभी जो नोट पकड़े गए हैं वे असल में भारत आए नोटों का एक बहुत छोटा सा हिस्सा मात्र है।

गुप्तचर ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार ये नोट छोटे मोटे जालसाजों द्वारा नहीं बनाए गए। इन्हें आधुनिकतम मशीनाें पर बहुत अच्छे कागज पर छापा गया है और इन्हें पहचानना काफी कठिन है। नोटों पर गुप्त निशान और वॉटर मार्क के अलावा रिजर्व बैंक का गुप्त कोड भी इनमें छापा गया है। इन सभी नोटों पर रिजर्व बैंक के वर्तमान गर्वनर डी सुब्बा राव के दस्तखत भी है। रंगों और माइक्रो लेटरिंग की समीक्षा कर के ही इन्हें आधुनिक प्रयोगशालाओं के जरिए पहचाना जा सकता है। ब्यूरों के अधिकारी बताते हैं कि बैंकों की एटीएम में पैसा ले जाने के लिए जिन प्राइवेट एजेंसियों का सहारा लिया जाता है उनका हाथ भी इस काले धंधे में हो सकता है।

नकली नोटों के साथ जिन लोगों की गिरफ्तारी अभी तक हुई है वे असल में सिर्फ छोटे मोटे एजेंट थे और उनसे नोटों के कारोबार के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाई है। नकली नोट छापने वाली मशीने या तो बांग्लादेश में ही लगाई गई है और या फिर इन्हें पाकिस्तान में छापा जा रहा है। जाहिर है कि पाकिस्तान ने हथियारों के आतंकवाद के बाद अब आर्थिक आतंकवाद को अपना अस्त्र बनाया है।

मनमोहन मंत्रिमंडल में अमेरिकी इशारे!

July 4th, 2009


कृष्णमोहन सिंह
डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 4 जुलाई-
क्या मनमोहन सिंह ने अपना मंत्रिमंडल बनाते समय अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की हिदायतों को भी ध्यान में रखा था? हर आर्थिक मंच पर अमेरिकी इरादों को नाकाम करने वाले पिछले वाणिज्य मंत्री कमलनाथ का विभाग भी शायद आज्ञाकारी आनंद शर्मा को इसीलिए सौपा गया।

इसके अलावा मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह को भी शायद इसलिए हटाया गया क्योंकि वे शिक्षा को अंतर्राष्ट्रीय कारोबार बनाने के अमेरिकी एजेंडे में बाधक बन रहे थे। अर्जुन सिंह ने कहा था कि विदेशी विश्वविद्यालय भारत में काम कर सकते हैं लेकिन उन्हें भारतीय नियमों के अनुसार ही चलना होगा। नए मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल विदेशी और खास तौर पर अमेरिकी विश्वविद्यालयों के के मामले में कोई नियंत्रण नहीं रखने के लिए भी राजी हो गए है। वैसे भी कपिल सिब्बल ने मंत्री पद संभालने के बाद जितनी घोषणाएं की है उन पर से वे वापस लौटते जा रहे है।

पूर्व विदेश व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा का कहना है कि मनमोहन सरकार का 100 दिन का एजेंडा अमेरिका का एजेंडा है। जिसमें अमेरिका के निर्देशो को पूरा करना है।क्योकि उसके बाद अमेरिका अपने व्यापारिक हित वाले अगले एजेंडे को लागू करने के लिए दबाव बनायेगा।

यशवंत सिन्हा का कहना है सोनिया व मनमोहन ने अर्जुन सिंह को इस बार अमेरिका के दबाव में ही मंत्री नही बनाया और उनकी जगह कपिल सिब्बल को मानवसंसाधन विकास मंत्री बनाया। क्योंकि अमेरिका हर हालत में भारत के लगभग 60 लाख करोड़ रूपये तक पहुंच गये और लगातार बढ़ रहे उच्चशिक्षा बाजार पर जल्दी से जल्दी कब्जा करना चाहता है। अर्जुन सिंह के शिक्षा मंत्री रहते अमेरिका व उसके यसमैन मनमोहन,मोंटेक,पित्रोदा पूरा जोरलगाकर भी भारत में अमेरिकी व विदेशी विश्वविद्यालयों की दुकान नही खोलवा पाये।

सोइस बार हर हालत में दुकान खोलवाने के लिए इसके सबसे बडा रोड़ा अर्जुन सिंह को ही मंत्रिमंडल से बाहर करवा दिया और यसमैन सिब्बल को मंत्री बनवा दिया जो मंत्री बनते ही सबसे पहले अपने एजेंडे में शिक्षा में आमूल परिवर्तन के बहाने विदेशी विश्वविद्यालयो को भारत में प्रवेश देने की व्यवस्था करने की बात कहे। और उसे हर हालत में करने की बात कह रहे हैं।

अमेरिका ने इसी तरह कमलनाथ को वाणिज्यमंत्री पद से हटवाया,क्योकि वह बीते 5 साल में भारतीय व एशियाई हित की बात कहते हुए लामबंदी करके एशियाई देशो को अमेरिका व यूरोप के कृषि उत्पादो का बाजार बनाने वाले नियम का पुरजोर विरोध किये।वह यदि फिर वाणिज्यमंत्री हो गये होते तो अमेरिका की मंशा फिर पूरी नही हो पाती।

सो अमेरिका ने उनकी जगह आनंद शर्मा को वाणिज्यमंत्री बनावा दिया। आनंद शर्मा अब अमेरिका की राह को आसान बनाने में जुट गये हैं। यशवंत सिन्हा का कहना है कि भारत में शिक्षा,कृषि,शोध पर तो अमेरिका 100 दिन में अपना एजेंडा लागू कराना ही चाहता है,उसके बाद परमाणु समझौते पर आगे भारत की बांह और मरोड़ कर लगभग गुलाम बनायेगा। इसके लिए श्रीमती क्लींटन जल्दी ही भारत आने वाली हैं। उनके आने के पहले ही मनमोहन सरकार अमेरिका के निर्देश पर कागज तैयार कर रही है।

जिसके तहत करार यह होगा कि अमेरिका के सहयोग से भारत में जो भी न्यूक्लियर प्लांट लगेंगे उनमे कभी रिसाव,विस्फोट हुआ,भोपाल गैस कांड जैसी कोई दुर्घटना हुई तो हर्जाने की भरपाई भारत सरकार करेगी अमेरिका नही। इसके अलावा भारत अमेरिका की वह शर्त भी मानेगा जिसके तहत अपने सभी परमाणु संयंत्र में लगे पार्ट को अमेरिकी निगरानी कमेटी को दिखायेगा । यदि किसी अन्य देश की मदद से परमाणु प्लांट लागाता है तो उसके पार्ट को भी अमेरिकी निगरानी कर्ता देखेंगे। उसमें गड़बडी का आरोप लगाकर अमेरिकी निगरानीकर्ता भारत पर भारी जुर्माना भी ठोक सकते हैं।

सब कुछ फर्जी मगर नौकरी फिर भी असली

July 4th, 2009



कृष्णमोहन सिंह
डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 4 जुलाई-
ये कहानी जालसाजी की है। फर्जी पीएचडी की है। फर्जी लेखक की है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग में हुए घपले की है। ये कहानी फर्जी आधारों पर असली नौकरी की भी है।

विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री रहते कपिल सिब्बल ने जिस डा.अनिल कुमार राय अंकित की काली करतूतो की जांच करने के लिए मार्क किया था,उसको महात्मा गांधी हिन्दी अंतरराष्ट्रीय विश्व विद्यालय वर्धा में पत्रकारिता के प्रोफेसर पद पर नियुक्ति की योजना बन गयी है। डा.अनिल कुमार राय अंकित पूर्वांचल वि.वि. जौनपुर के पत्रकारिता विभाग में लेक्चरर हेड थे। वहां से छुट्टी लेकर जुगाड़लगा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता वि.वि.,रायपुर में रीडर बन गये हैं।

लेकिन जौनपुर में रहते ही उसने यू.जी.सी. से एक 6 लाख रू. बजट वाला रिसर्च प्रोजेक्ट लिया था, विषय है- महिला राजनीतिक सशक्तिकरण में मीडिया की भूमिका (उ.प्र.), जो अब भी चल रहा है ,और यू.जी.सी. से फंड जा रहा है।क्योंकि उसने यह नही लिख कर दिया है कि जौनपुर में नही है और रायपुर में नौकरी कर रहा है।यू.जी.सी.के एक अफसर की कृपा से यह अभी भी चल रहा है।

अनिल राय अंकित ने राष्ट्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी संचार परिषद से दो दिन का सेमिनार कराने के लिए एकलाख 25 हजार रूपये लिया ,आई.सी.एस.एस.आर. से भी दो दिन सेमिनार कराने के लिए फंड लिया और दोनो सेमिनार जौनपुर में एक ही हाल में एक ही जगह 28 फरवरी 2007 व 1 मार्च 2007 को सुबह और शाम के सत्र में केवल बैनर बदल कर कर दिया।और दोनो जगह से फंड ले लिया।

राष्ट्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी संचार परिषद से इसी तरह के एक अन्य सीरिज में सेमिनार घोटाला मामले में कपिल सिब्बल ने दिल्ली के एक अखबार में प्रमुखता से खबर छपने के बाद जांच के लिए मार्क कर दिया। अनिल राय अंकित के इसी तरह के अन्य कारनामो में से सबसे प्रमुख है नकल करके पत्रकारिता की हिन्दी में 5 और अंग्रेजी में लगभग 10 किताबें लिखने की। अनिल राय अंकित ने इंटरनेट से प्रमुख विदेशी वि.वि. के प्रोफेसरो द्वारा लिखी अंग्रेजी की पुस्तको को लगभग जस का तस कापी करके शीर्षक बदल कर किताब अपने नाम से छाप लिया है। जिसका लेखक खुद बन गया है।

जबकि यह खुद उस तरह की अंग्रेजी एक पेज भी नही लिख सकता।इस मामले की शिकायत भी मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के पास पहुंच गयी है। बताया जाता है अनिल कुमार राय अंकित ने महात्मा गांधी हिन्दी अंतरराष्ट्रीय विश्व विद्यालय वर्धा के कुलपति को उनके एक रिश्तेदार के मार्फत पकड़ा है ,जो कि गोरखपुर वि.वि. में हिन्दी के रीडर हैं।

अंकित ने नकल करके एक हिन्दी में लिखी पुस्तक को जिस व्यक्ति को समर्पित की है उससे भी कुलपति के यहां सिफारिश लगवाया है।कहा जाता है कि उसको प्रोफेसर बनाया जाना लगभग तय हो गया है। इसी तरह वहां रीडर पद पर कृपाशंकर नामक व्यक्ति की नियुक्ति भी लगभग तय हो गयी बतायी जाती है।कहा जाता है कि कृपाशंकर की नियुक्ति के लिए वि.वि. के चांसलर ने दबाव बनाया है।

शोपियां कांड में अदालत ने कहा- सच बताओ

July 4th, 2009


मोहम्मद जलील
डेटलाइन इंडिया
श्रीनगर, 4 जुलाई-
कुख्यात शोपिया बलात्कार और हत्याकांड में जम्मू कश्मीर पुलिस के पकड़े गए और निलंबित चार अधिकारियों और दो गवाहों का नारको टेस्ट किया जाएगा। पुलिस ने पहले ये इल्जाम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल-सीआरपीएफ पर मढ़ने की कोशिश की थी लेकिन तथ्यों के सामने वे भी हार गए।

अब जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय में खुद मुख्य न्यायाधीश बारीन घोष ने मई के इस शर्मनाक हादसे के सिलसिले में कई गंभीर आदेश जारी किए है। कश्मीर बार एसोसिएशन ने इस मामले में न्याय की अपील की है। न्यायमूर्ति बारीन घोष ने कहा है कि उन दो गवाहों का भी नारको टेस्ट होना चाहिए जिन्होंने कहा था कि उन्होंने शोपिया पुलिस के पास शाम आठ बजे के बाद एक नीली फौजी गाड़ी से औरते के चीखने की आवाज सुनी थी।

अदालत ने आदेश दिया है कि जो पुलिस अधिकारी इस मामले की विभागीय जांच कर रहे हैं उन्हें बदल कर आईजी सीआईडी के जरिए जांच आगे बढ़ाई जाए। वर्तमान जांच अधिकारियों पर उन्हें कतई भरोसा नहीं है। शोपियां के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जावेद इकबाल मट्टू और डीएसपी रोहित बसकोटा की भूमिका पर भी सवाल किए गए हैं और इसीलिए उन्हें भी अपराधी करार देने की अपील पर विचार किया जा रहा है।

अभी जांच कर रहे अधिकारी ने अदालत का रुख देखते हुए खुद को पहले ही मामले की जांच से अलग कर लिया था लेकिन अब अदालत ने हर बार हर पेशी पर इस अधिकारी को आने से रोक दिया। अदालत ने कहा है कि उसे जो भी निर्देश देने हो वे अदालत के बाहर दिए जाएं। मामले में सीआरपीएफ के आईजी और सीबीआई की अपराध विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों को भी गवाह बनाया गया है। सीबीआई से कहा गया है कि वे जल्दी से जल्दी सारे अभियुक्त अधिकारियों की डीएनए रिपोर्ट दें। उन गुर्जरों को भी खोजने के आदेश दिए गए हैं जिन्होंने हत्या और बलात्कार के इस मामले में लाशों को सबसे पहले खोजा था।